जिन लड़को ने कभी हथेलियों को फैलाकर नही माँगी मोहब्बत बल्कि हमेशा अपने सपनों से इश्क़ किया, जिन लड़कों की घड़ी में कभी नही फंसा किसी का दुपट्टा बल्कि वो घड़ी इन्हें इक़्तिला करती रही कि मंजिल तक पहुँचने में बहुत कम समय है.
जिन लड़को ने कभी हथेलियों को फैलाकर नही माँगी मोहब्बत बल्कि हमेशा अपने सपनों से इश्क़ किया, जिन लड़कों की घड़ी में कभी नही फंसा किसी का दुपट्टा बल्कि वो घड़ी इन्हें इक़्तिला करती रही कि मंजिल तक पहुँचने में बहुत कम समय है. वो लड़के जो आधी रात को कभी नही डूबे महबूब की बातों में, वो तो उलझे रहे किताबो के शब्दजाल में, जिन्होंने खिलौनों का हाँथ छोड़ते ही थाम लिया जिम्मेदारियों का हाँथ, उन लड़कों की हथेलियों को चूम कर परोसी जानी चाहिए थोड़ी मोहब्बत. उनकी घड़ियों को थम जाना चाहिए उनके सबसे खूबसूरत लम्हें पर…
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